Thursday, 20 September 2012

Sahifa-e-Kamila, Sajjadia 67th dua (urdu tarjuma in HINDI) by imam zainul abedin a.s.



 सढ़सठवीं (67) दुआ
दुआए रोज़े जुमा

 
तमाम तारीफ़ उस अल्लाह तआला के लिये है जो पैदा करने और ज़िन्दगी बख़्शने से पहले मौजूद था और तमाम चीज़ों के फ़ना होने के बाद बाक़ी रहेगा। वह ऐसा इल्म वाला है के जो उसे याद रखे उसे भूलता नहीं, जो उसका शुक्र अदा करे उसके हाँ कमी नहीं होने देता, जो उसे पुकारे उसे महरूम नहीं करता, जो उससे उम्मीद रखे उसकी उम्मीद नहीं तोड़ता।
 
बारे इलाहा! मैं तुझे गवाह करता हूं और तू गवाह होने के लेहाज़ से बहुत काफ़ी है, और तेरे तमाम फ़रिश्तों और तेरे आसमानों में बसने वालों और तेरे अर्श के उठाने वालों और तेरे फ़र्सतादा नबियों (अ0) और रसूलों (अ0) और तेरी पैदा की हुई क़िस्म-क़िस्म की मख़लूक़ात को अपनी गवाही पर गवाह करता हूं के तू ही माबूद है और तेरे अलावा कोई माबूद नहीं। तू वहदहू लाशरीक है, तेरा कोई हमसर नहीं है तेरे क़ौल में न वादाखि़लाफ़ी होती है और न कोई तबदीली। और यह के मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह व आलेही वसल्लम तेरे ख़ास बन्दे और रसूल (स0) हैं जिन चीज़ों की ज़िम्मेदारी तूने उन पर आएद की वह बन्दों तक पहुंचा दीं। उन्होंने ख़ुदाए बुज़ुर्ग व बरतर की राह में जेहाद करके हक़क़े जेहाद अदा किया और सही-सही सवाब की ख़ुशख़बरी दी और वाक़ेई अज़ाब से डराया। बारे इलाहा! जब तक तू मुझे ज़िन्दा रखे अपने दीन पर साबित क़दम रख और जब के तूने मुझे हिदायत कर दी तो मेरे दिल को बेराह न होने दे और मुझे अपने पास से रहमत अता कर। बेशक तू ही नेमतों का बख़्शने वाला है। मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर रहमत नाज़िल फ़रमा और हमें उनके इत्तेबाअ और उनकी जमाअत में से क़रार दे और उनके गिर्दा में महशूर फ़रमा और नमाज़े जुमा के फ़रीज़े और उस दिन की दूसरों इबादतों के बजा लाने और फ़राएज़ पर अमल करने वालों पर क़यामत के दिन जो अताएं तूने तक़सीम की हैं उन्हें हासिल करने की तौफ़ीक़ मरहमत फ़रमा। बेशक तू साहेबे इक़्तेदार और हिकमत वाला है।

No comments:

Post a Comment